12% से ज्यादा टूटा बिटकॉइन, निवेशकों के ₹90 लाख करोड़ साफ

क्रिप्टो बाजार में भारी बिकवाली, ग्लोबल सेंटिमेंट कमजोर

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिली है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी बिटकॉइन में 12% से ज्यादा की तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ 24 घंटों के भीतर क्रिप्टो बाजार से करीब $1 ट्रिलियन (लगभग ₹90 लाख करोड़) की वैल्यू साफ हो गई। यह गिरावट अक्टूबर 2024 के बाद बिटकॉइन का सबसे निचला स्तर मानी जा रही है।


बिटकॉइन ₹ का भाव क्यों गिरा?

गुरुवार को बिटकॉइन 12% से ज्यादा फिसलकर करीब $63,295 के स्तर तक आ गया। यह स्तर पिछले कई महीनों में सबसे कमजोर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिनमें वैश्विक बाजारों में कमजोर सेंटिमेंट, टेक शेयरों में बिकवाली और निवेशकों की जोखिम से दूरी शामिल है।


24 घंटे में भारी लिक्विडेशन

बाजार में आई इस तेज गिरावट के चलते बड़े पैमाने पर पोजीशन लिक्विडेट हुईं। डेटा के मुताबिक, 24 घंटे के भीतर करीब $1 ट्रिलियन की क्रिप्टो पोजीशन लिक्विडेट हो गई। इसका सीधा असर छोटे और मिड-लेवल निवेशकों पर पड़ा, जिन्होंने लीवरेज के जरिए निवेश किया था।


सिर्फ बिटकॉइन नहीं, पूरा क्रिप्टो बाजार दबाव में

बिटकॉइन के साथ-साथ अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी भी तेज दबाव में नजर आईं।

Ethereum (ETH) में भी तेज गिरावट दर्ज की गई कई Altcoins 15% से 25% तक टूट गए कुल क्रिप्टो मार्केट कैप में भारी कमी आई

इससे साफ है कि गिरावट सिर्फ एक कॉइन तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे डिजिटल एसेट सेक्टर पर असर पड़ा।


ग्लोबल फैक्टर्स ने बढ़ाया दबाव

विशेषज्ञों के अनुसार, क्रिप्टो बाजार पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता है। अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख, शेयर बाजारों में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है।

इसके अलावा, अमेरिकी टेक शेयरों में कमजोरी और AI से जुड़े खर्च (Capex) को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भी जोखिम वाले एसेट्स पर दबाव बनाया है, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी भी शामिल है।


निवेशकों में डर का माहौल

तेज गिरावट के बाद बाजार में डर का माहौल बन गया है। कई निवेशक अपने नुकसान को सीमित करने के लिए जल्दबाजी में बिकवाली कर रहे हैं। इससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया। मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि जब तक सेंटिमेंट स्थिर नहीं होता, तब तक क्रिप्टो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।


क्या यह लॉन्ग-टर्म क्रैश है?

हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह गिरावट शॉर्ट-टर्म करेक्शन भी हो सकती है। क्रिप्टो बाजार पहले भी ऐसे तेज उतार-चढ़ाव देख चुका है। उनका मानना है कि मजबूत निवेशक इसे खरीदारी का मौका मान सकते हैं, लेकिन नए निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है।


आगे बाजार की दिशा क्या होगी?

आने वाले दिनों में क्रिप्टो बाजार की दिशा काफी हद तक इन बातों पर निर्भर करेगी:

अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर पर रुख ग्लोबल शेयर बाजारों की चाल निवेशकों का रिस्क सेंटिमेंट रेगुलेटरी अपडेट्स

अगर वैश्विक माहौल में सुधार आता है, तो बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी में रिकवरी देखने को मिल सकती है। लेकिन फिलहाल बाजार हाई वोलैटिलिटी ज़ोन में बना हुआ है।


निवेशकों के लिए क्या सलाह?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि:

घबराकर फैसले न लें बिना रिसर्च के निवेश से बचें केवल उतना ही पैसा लगाएं, जितना जोखिम उठा सकें लॉन्ग-टर्म सोच के साथ ही क्रिप्टो में निवेश करें