
भारत की मशहूर स्नैक्स और मिठाई बनाने वाली कंपनी हल्दीराम स्नैक्स फूड प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी एक बड़ी कॉरपोरेट डील को मंजूरी मिल गई है। देश की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म एल कैटरटन (L Catterton) को हल्दीराम में हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद हल्दीराम के भविष्य के विस्तार और वैश्विक रणनीति को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
CCI की मंजूरी क्यों है अहम
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग किसी भी बड़ी डील को मंजूरी देने से पहले यह सुनिश्चित करता है कि इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा पर कोई नकारात्मक असर न पड़े। एल कैटरटन द्वारा हल्दीराम में हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव की जांच के बाद CCI ने इसे हरी झंडी दे दी। इसका मतलब यह है कि यह सौदा भारतीय बाजार में किसी तरह की एकाधिकार या अनुचित प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा नहीं करेगा।
कौन है एल कैटरटन
एल कैटरटन एक जानी-मानी ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी और इन्वेस्टमेंट फर्म है, जो उपभोक्ता उत्पादों, रिटेल, फूड और लाइफस्टाइल सेक्टर में निवेश के लिए प्रसिद्ध है। इस फर्म का संबंध एलवीएमएच (LVMH Group) से भी जुड़ा हुआ माना जाता है, जो दुनिया के सबसे बड़े लग्ज़री ब्रांड समूहों में से एक है।
एल कैटरटन पहले भी कई बड़े फूड और कंज्यूमर ब्रांड्स में निवेश कर चुकी है, जिससे यह साफ है कि हल्दीराम में उसका निवेश एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
हल्दीराम: एक पारंपरिक ब्रांड से ग्लोबल पहचान तक
हल्दीराम की शुरुआत एक छोटे से पारंपरिक भारतीय मिठाई व्यवसाय के रूप में हुई थी, लेकिन आज यह भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी एक ग्लोबल ब्रांड बन चुका है। नमकीन, मिठाइयां, रेडी-टू-ईट फूड और स्नैक्स के क्षेत्र में हल्दीराम का नाम भरोसे का प्रतीक माना जाता है।
भारत के अलावा हल्दीराम के उत्पाद अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट और एशिया के कई देशों में उपलब्ध हैं।
इससे पहले भी हिस्सेदारी बेची जा चुकी है
यह पहली बार नहीं है जब हल्दीराम ने किसी विदेशी निवेशक को हिस्सेदारी बेची हो। इससे पहले 2025 में हल्दीराम ने सिंगापुर की ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म टेमासेक (Temasek), अल्फा वेव ग्लोबल और एक इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी को अपनी हिस्सेदारी बेची थी।
इन निवेशों का मकसद कंपनी के विस्तार, तकनीकी उन्नयन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पकड़ मजबूत करना रहा है।
इस डील से हल्दीराम को क्या फायदा होगा
एल कैटरटन के निवेश से हल्दीराम को कई स्तरों पर फायदा मिलने की उम्मीद है:
वैश्विक विस्तार – एल कैटरटन के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की मदद से हल्दीराम नए देशों में अपनी मौजूदगी बढ़ा सकती है। ब्रांड वैल्यू में इजाफा – एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म के जुड़ने से हल्दीराम की ब्रांड वैल्यू और भरोसे में और मजबूती आएगी। प्रोडक्ट इनोवेशन – नए फूड कैटेगरी, हेल्दी स्नैक्स और प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस बढ़ सकता है। ऑपरेशनल मजबूती – सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी में सुधार की संभावना है।
भारतीय FMCG सेक्टर के लिए क्या मायने
यह डील सिर्फ हल्दीराम के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय FMCG और फूड सेक्टर के लिए भी अहम मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय फूड ब्रांड्स में विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
साथ ही, यह सौदा अन्य भारतीय पारंपरिक ब्रांड्स के लिए भी रास्ता खोल सकता है कि वे वैश्विक निवेश के जरिए अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।
भविष्य की रणनीति पर नजर
हालांकि डील के तहत कितनी प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी जाएगी, इस पर आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि एल कैटरटन एक स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टर के रूप में हल्दीराम के साथ जुड़ेगी, न कि सिर्फ फाइनेंशियल निवेशक के तौर पर।
इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में हल्दीराम IPO, बड़े अधिग्रहण या अंतरराष्ट्रीय विस्तार जैसी योजनाओं पर भी काम कर सकती है।
निष्कर्ष
CCI से मंजूरी मिलने के बाद एल कैटरटन और हल्दीराम की यह डील अब औपचारिक रूप से आगे बढ़ सकेगी। यह साझेदारी हल्दीराम के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकती है, जिसमें परंपरा और आधुनिक वैश्विक बिजनेस रणनीति का संगम देखने को मिलेगा।
भारतीय उपभोक्ताओं के लिए इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले वर्षों में हल्दीराम के और भी नए, इनोवेटिव और अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्पाद बाजार में देखने को मिलें।
