लोन गारंटर: एक वित्तीय जिम्मेदारी या जोखिम ?

जब आप किसी व्यक्ति के लोन के लिए गारंटर के रूप में हस्ताक्षर करते हैं, तो आप बैंक को यह कानूनी वचन देते हैं कि यदि उधारकर्ता (Borrower) लोन चुकाने में असमर्थ रहता है, तो उस कर्ज की पूरी जिम्मेदारी आपकी होगी। बैंक आपको केवल एक ‘गवाह’ नहीं, बल्कि एक ‘सह-लेनदार’ के रूप में देखता है।


1. CIBIL स्कोर पर सीधा असर

जैसे ही लोन स्वीकृत होता है, वह लोन खाता आपके PAN कार्ड से जुड़ जाता है। आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में यह ‘गारंटर’ के रूप में दिखाई देने लगता है।

समय पर भुगतान: यदि उधारकर्ता हर महीने समय पर EMI चुका रहा है, तो आपके CIBIL स्कोर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

भुगतान में चूक (Default): यदि उधारकर्ता एक भी EMI मिस करता है, तो उसका असर केवल उसके स्कोर पर नहीं, बल्कि आपके स्कोर पर भी पड़ेगा। बैंक इसे आपकी ‘पेमेंट हिस्ट्री’ में एक विफलता के रूप में दर्ज करेगा, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर तेजी से गिर सकता है।


2. आपकी लोन पात्रता (Loan Eligibility) में कमी

भविष्य में यदि आप खुद के लिए होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लेना चाहते हैं, तो बैंक आपकी पात्रता की गणना करते समय उस लोन को भी आपकी देनदारी (Liability) मानेगा जिसके आप गारंटर हैं।

कर्ज की सीमा: बैंक यह मानकर चलता है कि आपको कभी भी उस लोन का भुगतान करना पड़ सकता है। इस वजह से, बैंक आपकी ‘लोन लेने की क्षमता’ को कम कर देता है। हो सकता है कि आपको अपनी आय के अनुसार जितना लोन मिलना चाहिए, उससे काफी कम मिले।


3. कानूनी और वित्तीय जोखिम

गारंटर बनने का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक सबसे पहले गारंटर को पकड़ता है।

• संपत्ति की कुर्की: यदि मुख्य उधारकर्ता भाग जाता है या भुगतान करने से मना कर देता है, तो बैंक आपकी संपत्ति, बैंक खाते या निवेश का उपयोग करके लोन की वसूली कर सकता है।

कानूनी कार्रवाई: बैंक आपको ‘विल्फुल डिफॉल्टर’ (जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाला) घोषित कर सकता है, जिससे आपके भविष्य के सभी वित्तीय रास्ते बंद हो सकते हैं।


गारंटर बनने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

यदि आप किसी के लिए गारंटर बनने का मन बना रहे हैं, तो इन 3 सवालों के जवाब खुद से जरूर पूछें:

1. उधारकर्ता की साख: क्या आप उस व्यक्ति की वित्तीय स्थिति और ईमानदारी पर 100% भरोसा करते हैं?

2. अपनी क्षमता: यदि उधारकर्ता भुगतान नहीं कर पाता, तो क्या आप अकेले उस पूरे लोन को चुकाने में सक्षम हैं?

3. भविष्य की योजनाएं: क्या आप अगले 5-10 वर्षों में कोई बड़ा लोन लेने की योजना बना रहे हैं?


गारंटर बनने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

यदि गारंटर बनना अनिवार्य हो, तो जोखिम कम करने के लिए ये कदम उठाएं:

लोन इंश्योरेंस: उधारकर्ता से कहें कि वह लोन का बीमा (Credit Insurance) कराए। इससे उधारकर्ता की मृत्यु या दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनी लोन चुकाएगी और आप पर बोझ नहीं आएगा।

• सीमित गारंटी: यदि संभव हो, तो बैंक से केवल लोन के एक निश्चित हिस्से की गारंटी देने की बात करें, न कि पूरे लोन की।

नियमित निगरानी: समय-समय पर अपनी CIBIL रिपोर्ट चेक करते रहें और उधारकर्ता से पूछते रहें कि भुगतान सही चल रहा है या नहीं।


निष्कर्ष

गारंटर बनना एक भावनात्मक निर्णय हो सकता है, लेकिन इसके परिणाम पूरी तरह वित्तीय होते हैं। आपकी एक छोटी सी मदद आपके वर्षों की मेहनत से बनाए गए क्रेडिट स्कोर को खराब कर सकती है। इसलिए, ‘हाँ’ कहने से पहले सभी नियमों और शर्तों को बारीकी से पढ़ें।