
आयकर विभाग ने इनकम टैक्स एक्ट–2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जो भारत की कर व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यह नया कानून 1962 से लागू मौजूदा आयकर अधिनियम की जगह लेगा, जो पिछले 60 से अधिक वर्षों से चला आ रहा है। सरकार का उद्देश्य टैक्स नियमों को सरल, स्पष्ट और आधुनिक बनाना है, ताकि करदाताओं के लिए अनुपालन (Compliance) आसान हो सके।
कितने नियम शामिल किए गए हैं?
ड्राफ्ट इनकम टैक्स एक्ट–2026 में कुल 333 नियम शामिल किए गए हैं। इनमें टैक्स की गणना, संपत्तियों का मूल्यांकन, कैपिटल गेन, होल्डिंग अवधि, रिटर्न फाइलिंग और नए ITR फॉर्मेट जैसे कई अहम प्रावधान शामिल हैं।
नया कानून कब से लागू होगा?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकता है। यानी वित्त वर्ष 2026–27 से करदाता नए कानून के तहत टैक्स रिटर्न दाखिल करेंगे।
संपत्तियों के मूल्यांकन में बदलाव
नए ड्राफ्ट में संपत्तियों (Assets) की फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) तय करने के नियमों को अधिक स्पष्ट किया गया है। इससे:
रियल एस्टेट शेयर म्यूचुअल फंड अन्य निवेश
के मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी और टैक्स विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
कैपिटल एसेट्स की होल्डिंग अवधि
ड्राफ्ट में कैपिटल एसेट्स की होल्डिंग अवधि की गणना को सरल बनाने की कोशिश की गई है। इससे यह तय करना आसान होगा कि कोई निवेश शॉर्ट टर्म है या लॉन्ग टर्म, और उस पर कितना टैक्स लगेगा।
नया और सरल ITR फॉर्मेट
करदाताओं के लिए सबसे राहत भरा बदलाव नया सरल ITR फॉर्मेट माना जा रहा है। नए फॉर्म का मकसद:
है, जिससे आम करदाताओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।
भाषा और संरचना में सुधार
1962 के पुराने आयकर कानून की भाषा जटिल और कानूनी शब्दों से भरी हुई थी। नए ड्राफ्ट में:
सरल भाषा छोटे और स्पष्ट सेक्शन दोहराव को हटाने
पर जोर दिया गया है, ताकि कानून को समझना आसान हो।
करदाताओं को क्या फायदे होंगे?
नए इनकम टैक्स एक्ट से करदाताओं को कई फायदे मिल सकते हैं:
अनावश्यक जानकारी कम करना रिटर्न भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना गलतियों की संभावना घटाना
टैक्स नियमों की बेहतर समझ विवाद और नोटिस की संभावना कम तेज और आसान रिटर्न प्रोसेस डिजिटल टैक्स सिस्टम को बढ़ावा
क्या टैक्स दरों में बदलाव होगा?
फिलहाल जारी ड्राफ्ट में टैक्स स्लैब या दरों में किसी बड़े बदलाव का जिक्र नहीं है। यह ड्राफ्ट मुख्य रूप से संरचना और प्रक्रिया को सरल बनाने पर केंद्रित है। टैक्स दरों में बदलाव सरकार अलग से बजट के माध्यम से कर सकती है।
विशेषज्ञों की राय
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नया कानून भारत की टैक्स प्रणाली को वैश्विक मानकों के करीब लाने की दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि, अंतिम रूप से लागू होने से पहले इसमें और सुझावों के आधार पर बदलाव संभव हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, इनकम टैक्स एक्ट–2026 का ड्राफ्ट करदाताओं के लिए एक बड़ा सुधार साबित हो सकता है। सरल नियम, स्पष्ट प्रावधान और नया ITR सिस्टम टैक्स फाइलिंग को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना सकता है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि अंतिम कानून में क्या-क्या बदलाव किए जाते हैं और इसे किस रूप में लागू किया जाता है।