ट्रेड डील फ्रेमवर्क से बाजार को सपोर्ट, गिफ्ट निफ्टी में जोरदार उछाल; शेयर बाजार में तेजी से खुलने के संकेत

भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील फ्रेमवर्क को लेकर सामने आए सकारात्मक संकेतों के बाद शेयर बाजार में मजबूत तेजी के संकेत मिल रहे हैं। सोमवार सुबह गिफ्ट निफ्टी में करीब 200 अंकों की उछाल देखने को मिली, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आज घरेलू शेयर बाजार NSE और BSE पर मजबूती के साथ शुरुआत कर सकता है। वैश्विक बाजारों से मिल रहे सहारे और बेहतर ट्रेड सेंटिमेंट ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।


गिफ्ट निफ्टी से मिला पॉजिटिव संकेत

सोमवार को गिफ्ट निफ्टी लगभग 200 अंकों की बढ़त के साथ ट्रेड करता दिखा। गिफ्ट निफ्टी आमतौर पर यह संकेत देता है कि भारतीय बाजार की ओपनिंग किस दिशा में हो सकती है। मौजूदा उछाल से यह साफ है कि निवेशक भारत-अमेरिका ट्रेड डील को बाजार के लिए सकारात्मक मान रहे हैं।

शुक्रवार को निफ्टी 50 इंडेक्स 25,693 के स्तर पर बंद हुआ था। ऐसे में आज के सत्र में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में तेजी देखने को मिल सकती है।


ट्रेड डील फ्रेमवर्क क्यों है अहम?

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील फ्रेमवर्क में कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले कुछ रेसिप्रोकल टैरिफ में कटौती करने पर विचार कर रहा है। इससे भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है।

विशेष रूप से टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स और आईटी सेवाओं जैसे सेक्टरों के लिए यह डील सकारात्मक मानी जा रही है। निवेशकों को उम्मीद है कि ट्रेड डील से भारत की निर्यात क्षमता को मजबूती मिलेगी और कंपनियों की कमाई पर भी इसका असर दिखेगा।


बाजार सेंटिमेंट में सुधार

पिछले कुछ सत्रों में वैश्विक अनिश्चितताओं और मुनाफावसूली के चलते बाजार में दबाव देखा गया था। हालांकि, अब ट्रेड डील से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने बाजार सेंटिमेंट को मजबूत किया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली में भी कुछ हद तक कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर ट्रेड डील से जुड़े संकेत और स्पष्ट होते हैं, तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है।


किन सेक्टरों को मिल सकता है फायदा?

ट्रेड डील फ्रेमवर्क का सबसे ज्यादा असर एक्सपोर्ट आधारित सेक्टरों पर पड़ने की संभावना है।

आईटी सेक्टर: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा आईटी सर्विस मार्केट है। ट्रेड डील से इस सेक्टर में भरोसा बढ़ सकता है। फार्मा सेक्टर: टैरिफ में राहत से भारतीय फार्मा कंपनियों के मार्जिन में सुधार हो सकता है। मेटल और ऑटो कंपोनेंट्स: निर्यात बढ़ने से इन सेक्टरों को भी सपोर्ट मिल सकता है।

इसके अलावा, बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भी बाजार की ओवरऑल मजबूती का फायदा देखने को मिल सकता है।


ग्लोबल मार्केट्स से भी मिला सपोर्ट

एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला लेकिन सकारात्मक रुख देखने को मिला है। अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र में स्थिरता रही, जिससे निवेशकों का जोखिम लेने का भरोसा बढ़ा है। डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में फिलहाल कोई बड़ा दबाव नहीं दिख रहा, जो उभरते बाजारों के लिए राहत की बात है।


निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी में निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। हालांकि सेंटिमेंट सकारात्मक है, लेकिन किसी भी बड़े फैसले से पहले वैश्विक संकेतों और ट्रेड डील से जुड़ी आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है।

लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह समय चरणबद्ध निवेश का हो सकता है, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।


तकनीकी स्तरों पर नजर

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 25,800–26,000 का स्तर एक अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं, नीचे की ओर 25,500 का स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। अगर निफ्टी रेजिस्टेंस के ऊपर टिकता है, तो बाजार में नई तेजी का दौर शुरू हो सकता है।


आगे क्या?

फिलहाल बाजार की नजर भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी आगे की घोषणाओं पर टिकी हुई है। यदि टैरिफ कटौती और व्यापारिक सहमति को लेकर स्पष्टता आती है, तो शेयर बाजार में तेजी का रुझान और मजबूत हो सकता है।

कुल मिलाकर, गिफ्ट निफ्टी में दिख रही तेजी और ट्रेड डील से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों और ट्रेड डील की प्रगति पर निर्भर करेगी।