
हाल ही में कमोडिटी बाजार में एक बड़ी हलचल देखी गई है, जिसने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेष रूप से चांदी (Silver) की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार के गलियारों में हलचल मचा दी है। वैश्विक स्तर पर चांदी की कीमतें $70 प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिर गई हैं, जिसका सीधा और गहरा असर भारतीय बाजारों और विशेषकर Silver ETF (Exchange Traded Funds) पर पड़ा है। शुक्रवार के सत्र में सिल्वर ईटीएफ में करीब 8% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसने कई निवेशकों के पोर्टफोलियो को लाल निशान में धकेल दिया है।
बाजार की वर्तमान स्थिति और आंकड़ों का खेल
सिल्वर ईटीएफ में 8% की गिरावट के साथ-साथ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी चांदी के फ्यूचर्स (Futures) में करीब 6% की कमजोरी देखी गई। यह गिरावट अचानक नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक संकेतक, डॉलर की मजबूती और औद्योगिक मांग में आए उतार-चढ़ाव जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं।
जब भी किसी कमोडिटी की कीमत एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल (जैसे यहां $70/औंस) को तोड़ती है, तो बाजार में ‘पैनिक सेलिंग’ या घबराहट में बिकवाली का माहौल बन जाता है। शुक्रवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां निवेशकों ने घाटे से बचने के चक्कर में अपनी होल्डिंग्स खाली करनी शुरू कर दी।
विशेषज्ञों की राय: घबराहट में न लें फैसला
बाजार के जानकारों और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गिरावट अस्थाई हो सकती है। विशेषज्ञों ने निवेशकों को ‘पैनिक सेलिंग’ (Panic Selling) से बचने की कड़ी सलाह दी है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए चांदी अभी भी एक मजबूत विकल्प है।
विशेषज्ञों ने पोर्टफोलियो प्रबंधन के लिए कुछ मुख्य सुझाव दिए हैं:
1. एसेट एलोकेशन (Asset Allocation): अपने कुल पोर्टफोलियो का करीब 10-15% हिस्सा गोल्ड और सिल्वर जैसे कीमती धातुओं में रखना चाहिए। यह न केवल रिस्क को कम करता है, बल्कि मुद्रास्फीति (Inflation) के खिलाफ एक सुरक्षा कवच (Hedge) के रूप में भी काम करता है।
2. औद्योगिक मांग (Industrial Demand): सोने के विपरीत, चांदी का उपयोग उद्योगों में बहुत अधिक होता है। सौर ऊर्जा (Solar Energy), इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की भारी खपत होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग के कारण मध्यम से लंबी अवधि में चांदी का आउटलुक ‘स्थिर’ बना हुआ है।
सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) क्या है और यह क्यों गिरा?
नए निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि सिल्वर ईटीएफ क्या है। यह एक ऐसा निवेश उपकरण है जो आपको भौतिक चांदी खरीदे बिना चांदी की कीमतों में निवेश करने की सुविधा देता है। चूंकि यह सीधे चांदी की बाजार कीमतों से जुड़ा होता है, इसलिए जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी गिरती है, ईटीएफ की एनएवी (NAV) भी गिर जाती है।
गिरावट के मुख्य कारण:
• डॉलर इंडेक्स में मजबूती: जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी महंगी हो जाती है, जिससे इसकी मांग और कीमत घटती है।
• ब्याज दरों का डर: केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बदलाव की संभावना भी कीमती धातुओं की चमक को फीका कर देती है।
• मुनाफावसूली: पिछले कुछ समय में चांदी ने अच्छे रिटर्न दिए थे, जिसके बाद अब बड़े निवेशक मुनाफावसूली (Profit Booking) कर रहे हैं।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
यदि आप एक निवेशक हैं और इस गिरावट से चिंतित हैं, तो नीचे दी गई रणनीतियों पर विचार कर सकते हैं:
• एसआईपी (SIP) का रास्ता अपनाएं: यदि आप सिल्वर ईटीएफ में निवेश कर रहे हैं, तो एकमुश्त राशि लगाने के बजाय गिरावट के समय धीरे-धीरे खरीदारी (Buy on Dips) करें। इससे आपकी खरीद लागत का औसत (Averaging) बेहतर होगा।
• लंबी अवधि का नजरिया: कीमती धातुएं कम समय के लिए अस्थिर हो सकती हैं, लेकिन 3 से 5 साल के नजरिए से देखें तो इन्होंने ऐतिहासिक रूप से सुरक्षित रिटर्न दिया है।
• जोखिम क्षमता को समझें: चांदी सोने की तुलना में अधिक ‘वॉलाटाइल’ (अस्थिर) होती है। इसलिए इसमें निवेश तभी करें जब आप कीमतों में 10-20% के उतार-चढ़ाव को सहने की क्षमता रखते हों।
निष्कर्ष
चांदी का $70/औंस से नीचे जाना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव है, लेकिन यह इस धातु के अंत का संकेत नहीं है। औद्योगिक क्रांति और ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ती दुनिया में चांदी की प्रासंगिकता बनी रहेगी। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे बाजार के शोर से बचें और अपने वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर संयम बनाए रखें।
जैसा कि विशेषज्ञों ने कहा है, अपने पोर्टफोलियो को संतुलित रखें और गिरावट को डर के बजाय एक अवसर के रूप में देखें।