
भारत में आम धारणा यह है कि रिटायरमेंट के बाद होम लोन मिलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, हकीकत यह है कि 60 साल से अधिक उम्र के लोग भी बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) से होम लोन ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए कुछ खास शर्तें और नियम लागू होते हैं, जो युवा आवेदकों की तुलना में अधिक सख़्त होते हैं।
उम्र होम लोन में क्यों अहम होती है?
होम लोन आमतौर पर लंबी अवधि के लिए दिया जाता है, जो 15 से 30 साल तक हो सकता है। ऐसे में बैंक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लोन लेने वाला व्यक्ति पूरे समय तक नियमित रूप से EMI चुका सके। 60 वर्ष से अधिक उम्र के आवेदकों के मामले में बैंक को यह जोखिम ज़्यादा लगता है कि रिटायरमेंट के बाद आय कम हो सकती है। इसी वजह से उम्र होम लोन की पात्रता तय करने में एक अहम फैक्टर बन जाती है।
क्या वरिष्ठ नागरिकों को होम लोन मिलता है?
हां, कई बैंक और NBFC वरिष्ठ नागरिकों को होम लोन देते हैं। हालांकि, लोन मंज़ूरी पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि आवेदक की आय कितनी स्थिर है और उसकी रिपेमेंट क्षमता कैसी है। बैंक यह देखता है कि लोन लेने के बाद भी आवेदक के पास रोज़मर्रा के खर्च पूरे करने के लिए पर्याप्त धन बचे।
आय के कौन-कौन से स्रोत मान्य होते हैं?
60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए बैंक केवल सैलरी को ही नहीं, बल्कि अन्य आय स्रोतों को भी मान्यता देते हैं। इनमें शामिल हैं:
पेंशन से मिलने वाली नियमित आय किराए से प्राप्त आय फिक्स्ड डिपॉज़िट या निवेश से मिलने वाला ब्याज बिज़नेस या प्रोफेशनल इनकम शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेशों से होने वाली आय
यदि ये आय स्रोत स्थिर और नियमित हैं, तो बैंक होम लोन देने पर विचार करता है।
लोन की अवधि क्यों होती है कम?
वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाले होम लोन की अवधि आमतौर पर कम रखी जाती है। अधिकतर बैंक यह शर्त रखते हैं कि लोन की पूरी राशि 70 से 75 वर्ष की उम्र तक चुका दी जाए। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति 62 साल की उम्र में लोन लेता है, तो उसे 8 से 12 साल की अवधि के लिए ही लोन मिल सकता है।
कम अवधि का सीधा असर EMI पर पड़ता है। लोन की अवधि जितनी कम होगी, EMI उतनी ही अधिक होगी। इसलिए वरिष्ठ नागरिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बढ़ी हुई EMI आराम से चुका सकें।
क्रेडिट स्कोर की भूमिका
होम लोन में क्रेडिट स्कोर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए। 750 या उससे अधिक का क्रेडिट स्कोर होने पर लोन मंज़ूरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। अच्छा क्रेडिट स्कोर यह दर्शाता है कि आवेदक ने पहले लिए गए लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर किया है।
कम क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक या NBFC या तो लोन रिजेक्ट कर सकते हैं या फिर ज्यादा ब्याज दर पर लोन ऑफर कर सकते हैं।
सह-आवेदक जोड़ने से कैसे बढ़ती है संभावना?
कई मामलों में बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सलाह देते हैं कि वे किसी कामकाजी परिवार के सदस्य को सह-आवेदक बनाएं। आमतौर पर बेटा, बेटी या जीवनसाथी सह-आवेदक बनाए जाते हैं। इससे दो फायदे होते हैं:
कुल पारिवारिक आय बढ़ जाती है बैंक को रिपेमेंट का जोखिम कम लगता है
सह-आवेदक होने से लोन की राशि और अवधि दोनों बढ़ सकती हैं।
ब्याज दर और शर्तें कैसी होती हैं?
वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर आमतौर पर सामान्य होम लोन जैसी ही होती है, लेकिन कुछ मामलों में NBFC थोड़ी अधिक दर पर लोन देते हैं। बैंक यह भी देखता है कि संपत्ति का मूल्यांकन, लोकेशन और दस्तावेज़ पूरी तरह सही हों।
इसके अलावा, कुछ बैंक अतिरिक्त गारंटी या इंश्योरेंस लेने की शर्त भी रख सकते हैं।
लोन लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?
60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को होम लोन लेते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
EMI आपकी मासिक आय के 30–40% से अधिक न हो आपातकालीन खर्च के लिए अलग फंड रखें मेडिकल खर्चों को ध्यान में रखकर प्लानिंग करें लोन अवधि और ब्याज दर की तुलना जरूर करें
निष्कर्ष
60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए होम लोन लेना संभव है, लेकिन यह पूरी तरह उनकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। स्थिर आय, अच्छा क्रेडिट स्कोर और मजबूत रिपेमेंट क्षमता होने पर बैंक और NBFC होम लोन देने से इनकार नहीं करते।
हालांकि, लोन लेने से पहले सभी शर्तों को अच्छी तरह समझना और अपनी आर्थिक स्थिति का ईमानदारी से आकलन करना बेहद ज़रूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह की वित्तीय परेशानी न हो।