
हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार से जुड़ी दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ जहां भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार नियामक SEBI ने ट्रेडिंग के नियमों में कड़ाई की है।
1. भारत-अमेरिका ट्रेड डील: आपकी रसोई और जेब पर सीधा असर
भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम ट्रेड डील फ्रेमवर्क (Interim Trade Deal Framework) तैयार हुआ है, जिसका सीधा प्रभाव आम जनता की थाली और बजट पर पड़ने वाला है।
क्या सस्ता होगा?
इस समझौते के तहत भारत कुछ अमेरिकी औद्योगिक और चुनिंदा कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क (Tariff) कम करेगा। इसके परिणामस्वरूप बाजार में निम्नलिखित चीजें सस्ती हो सकती हैं:
• फल और ड्राई फ्रूट्स: अमेरिका से आने वाले ताजे फल और बादाम-अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स के दाम गिर सकते हैं।
• सोयाबीन तेल: खाने के तेल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
• वाइन: विदेशी वाइन के शौकीनों के लिए भी यह डील राहत भरी हो सकती है।
क्या सस्ता होगा?
• डेयरी और पशुपालन: देश में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र की लागत घटने की उम्मीद जताई जा रही है।
• MSME और निर्यातक: यह डील सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) और भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर और राहत लेकर आ सकती है。
2. SEBI का नया नियम: एक्सपायरी डे पर ट्रेडिंग होगी महंगी
शेयर बाजार में सक्रिय ट्रेडर्स के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ट्रेडिंग जोखिम को कम करने के लिए मार्जिन नियमों में बदलाव किया है।
कैलेंडर स्प्रेड मार्जिन बेनिफिट होगा खत्म:
• सेबी ने सिंगल-स्टॉक डेरिवेटिव्स में एक्सपायरी के दिन मिलने वाले ‘कैलेंडर स्प्रेड मार्जिन बेनिफिट’ को खत्म करने का फैसला किया है।
• कब से लागू होगा: यह नया नियम 5 मई से प्रभावी होगा।
ट्रेडर्स पर प्रभाव:
• अब एक्सपायरी वाले दिन ट्रेडर्स को पूरा मार्जिन देना होगा, जिससे ट्रेडिंग करना पहले के मुकाबले महंगा हो जाएगा।
• सेबी का मानना है कि इससे बाजार में जोखिम (Risk) कम होगा, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर उन रिटेल और प्रोफेशनल ट्रेडर्स पर पड़ेगा जो एक्सपायरी के दिन अधिक सक्रिय रहते हैं।
• इस संबंध में सेबी ने 5 फरवरी को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी कर विस्तृत जानकारी दी थी।
निष्कर्ष
एक तरफ जहां भारत-अमेरिका ट्रेड डील से आम उपभोक्ताओं को वैश्विक उत्पादों तक सस्ती पहुंच मिलेगी और निर्यात बढ़ेगा, वहीं दूसरी तरफ सेबी के सख्त नियम बाजार में सट्टेबाजी को कम करने और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम हैं।
