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अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट: गूगल के नतीजों से घबराए निवेशक, टेक शेयरों पर दबाव

अमेरिकी शेयर बाजार में गुरुवार को जबरदस्त गिरावट देखने को मिली, जिसने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कमजोर बाजार सेंटिमेंट और बड़ी टेक कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के कारण वॉल स्ट्रीट के प्रमुख इंडेक्स तेज गिरावट के साथ बंद हुए। खास तौर पर गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों ने निवेशकों को निराश किया, जिसका असर पूरे टेक सेक्टर पर साफ तौर पर देखने को मिला।


प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में तेज गिरावट

गुरुवार के कारोबारी सत्र में डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 592 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, S&P 500 में लगभग 85 अंकों की कमजोरी दर्ज की गई और टेक शेयरों से भरे नैस्डैक कंपोजिट में करीब 363 अंकों की गिरावट देखने को मिली। इन तीनों प्रमुख इंडेक्स की गिरावट यह दर्शाती है कि बाजार में डर और सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर मिलेजुले संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ महंगाई में धीरे-धीरे नरमी के संकेत हैं, तो दूसरी ओर कंपनियों की कमाई और भविष्य के आउटलुक को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह से निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।


गूगल (Alphabet) के नतीजों से बाजार को झटका

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह गूगल की पैरेंट कंपनी Alphabet के तिमाही नतीजे रहे। कंपनी ने Q4 में भले ही स्थिर राजस्व दिखाया हो, लेकिन AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर बढ़ते खर्च और आने वाले समय के लिए कमजोर कैपेक्स आउटलुक ने निवेशकों को चिंतित कर दिया।

Alphabet के शेयरों में एक ही दिन में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे टेक सेक्टर पर दबाव बढ़ गया। निवेशकों को यह डर सता रहा है कि AI पर भारी निवेश का असर कंपनी के मुनाफे पर अल्पकालिक रूप से नकारात्मक पड़ सकता है।


टेक सेक्टर में बढ़ी चिंता

गूगल के नतीजों के बाद सिर्फ Alphabet ही नहीं, बल्कि अन्य बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। Microsoft, Amazon, Meta और Apple जैसे दिग्गज शेयरों में भी दबाव रहा। निवेशकों को डर है कि आने वाले समय में टेक कंपनियों को बढ़ती लागत, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च और विज्ञापन बाजार में संभावित सुस्ती का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही AI लंबी अवधि में कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो, लेकिन फिलहाल इसका बोझ कंपनियों के मुनाफे और कैश फ्लो पर पड़ रहा है, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।


वैश्विक संकेतों से भी बढ़ी अस्थिरता

अमेरिकी बाजार की गिरावट के पीछे सिर्फ घरेलू कारण ही नहीं, बल्कि वैश्विक कारक भी जिम्मेदार हैं। भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार में सुस्ती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति को लेकर स्पष्टता न होने से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।


भारतीय शेयर बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

अमेरिकी बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का असर आज भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। आमतौर पर जब वॉल स्ट्रीट में तेज गिरावट आती है, तो एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिलती है। खासकर आईटी और टेक शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि इन कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका से जुड़ा हुआ है।

हालांकि, घरेलू निवेशकों की नजर भारत की आर्थिक स्थिति, कॉर्पोरेट नतीजों और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर भी रहेगी। अगर घरेलू संकेत मजबूत रहते हैं, तो गिरावट सीमित भी रह सकती है।

निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशकों को घबराने के बजाय लॉन्ग टर्म रणनीति अपनानी चाहिए। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर हो सकता है। साथ ही, पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि जोखिम को संतुलित किया जा सके।


निष्कर्ष

कुल मिलाकर, अमेरिकी शेयर बाजार में आई यह गिरावट बाजार की मौजूदा अनिश्चितता को दर्शाती है। गूगल के तिमाही नतीजों और AI खर्च को लेकर बढ़ी चिंताओं ने निवेशकों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में अन्य बड़ी टेक कंपनियों के नतीजे और फेड के संकेत यह तय करेंगे कि बाजार की दिशा आगे कैसी रहने वाली है। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

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