अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए ₹13,705 करोड़ का बजट: जानिए इसरो कहां और कैसे करेगा खर्च

भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को एक बार फिर बड़ी प्राथमिकता दी है। अंतरिक्ष विज्ञान विभाग (Department of Space) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए कुल ₹13,705 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को और मजबूत करना चाहती है।

पिछले वित्त वर्ष 2025–26 में अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ₹12,448 करोड़ का बजट रखा गया था। इस बार इसमें बढ़ोतरी कर दी गई है ताकि नए मिशनों, आधुनिक तकनीक, बुनियादी ढांचे और मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जा सके।


बजट में कहां-कहां होगा खर्च?

कुल ₹13,705 करोड़ के बजट को दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है—

राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) और पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure)।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

₹7,329.7 करोड़ राजस्व व्यय के लिए रखे गए हैं ₹6,375.9 करोड़ पूंजीगत व्यय के रूप में निर्धारित किए गए हैं

राजस्व व्यय में इसरो के रोज़मर्रा के संचालन, रिसर्च, सैलरी, रखरखाव और चल रहे प्रोजेक्ट्स से जुड़े खर्च शामिल होते हैं। वहीं, पूंजीगत व्यय का इस्तेमाल नए उपकरण, आधुनिक तकनीक, लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट और इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में किया जाता है।


लॉन्च व्हीकल और मिशन पर खास फोकस

इस बजट का एक बड़ा हिस्सा इसरो के लॉन्च व्हीकल कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा। इसमें PSLV, GSLV और LVM3 जैसे रॉकेट शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल उपग्रहों और मिशनों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए किया जाता है।

इसके अलावा, आने वाले समय में प्रस्तावित नए मिशनों की तैयारी पर भी यह बजट खर्च होगा। भारत लगातार अपनी लॉन्च क्षमता बढ़ा रहा है ताकि देश के साथ-साथ विदेशी सैटेलाइट लॉन्च की मांग को भी पूरा किया जा सके।


गगनयान मिशन को मिलेगा बल

भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान इसरो की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। इस बजट से गगनयान मिशन से जुड़े तकनीकी परीक्षण, ट्रेनिंग, सुरक्षा प्रणाली और मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारियों को और गति मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को खुद के रॉकेट से अंतरिक्ष में भेज सके। इसके लिए मजबूत फंडिंग बेहद जरूरी है, और यह बजट उसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।


अंतरिक्ष केंद्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास

इसरो के विभिन्न अंतरिक्ष केंद्र जैसे श्रीहरिकोटा, बेंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और अहमदाबाद में स्थित केंद्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर बनाने पर भी खर्च किया जाएगा।

नई प्रयोगशालाएं, टेस्टिंग फैसिलिटी, आधुनिक कंट्रोल सिस्टम और रिसर्च से जुड़े ढांचे को मज़बूत करने के लिए पूंजीगत व्यय का उपयोग किया जाएगा। इससे भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षमता को वैश्विक स्तर पर और पहचान मिलेगी।


सैटेलाइट और स्पेस एप्लीकेशन

इस बजट का इस्तेमाल संचार, मौसम, नेविगेशन और पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) से जुड़े सैटेलाइट प्रोग्राम्स पर भी किया जाएगा। इन सैटेलाइट्स से कृषि, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, दूरसंचार और नेविगेशन जैसी सेवाओं में सुधार होता है।

सरकार चाहती है कि अंतरिक्ष तकनीक का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचे, और इसी वजह से स्पेस एप्लीकेशन पर लगातार निवेश किया जा रहा है।


निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को बढ़ावा

भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। इसरो और सरकार मिलकर स्पेस स्टार्टअप्स को सहयोग दे रहे हैं ताकि देश में नवाचार को बढ़ावा मिल सके।

यह बजट अप्रत्यक्ष रूप से निजी क्षेत्र को भी फायदा पहुंचाएगा, क्योंकि कई प्रोजेक्ट्स में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।


भारत की वैश्विक स्थिति होगी मजबूत

अंतरिक्ष बजट में यह बढ़ोतरी भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की सूची में और ऊपर ले जाने में मदद करेगी। कम लागत में सफल मिशन लॉन्च करने की क्षमता पहले से ही भारत की पहचान है, और इस बजट से इस ताकत को और मजबूत किया जाएगा।


निष्कर्ष

₹13,705 करोड़ का यह बजट भारत के अंतरिक्ष भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश है। इससे न केवल इसरो के मिशनों को नई गति मिलेगी, बल्कि विज्ञान, तकनीक और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सरकार का यह कदम साफ दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।